पादप आकारिकी, Plant Morphology

Updated: Sep 6

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पादप आकारिकी (Plant morphology या phytomorphology) में पादपों के शरिर के वाह्य आकार तथा वाह्य संरचना का अध्ययन किया जाता है। यह पादप शारीरिकी (plant anatomy) से अलग मानी जाती है। पादप आकारिकी, पादपों को देखकर पहचानने में सहायक होती है।

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विभिन्न पादप भागो जैसे -- जड़ , तना , पत्ती , पुष्प , फल आदि के रूपों तथा गुणों के अध्ययन को आकारिकी कहते है।

जड़ ( root) · जड़ पोधो का अवरोही भाग है , जो मुलांकुर से विकसित होता है। · जड़ सदैव प्रकाश से दूर भूमि में वृद्धि करती है।

जड़ दो प्रकार की होती है -- (1) मुसला जड़ ( tap root) (2) अपस्थानिक जड़ ( adventitious root )

तना ( stem) · यह पौधे का वह भाग है जो प्रकाश की और वृद्धि करता है। · यह प्रांकुर से विकसित होता है। यह पौधे का प्ररोह तंत्र बनता है।


· पत्ती ( leaf ) · यह हरे रंग की होती है। इसका मुख्य कार्य प्रकाश - संश्लेषण क्रिया के द्वारा भोजन बनाना है।


पुष्प ( flower ) · यह पौधे का जनन अंग है। · पुष्प में बाह्य दलपुंज , दलपुंज, पुसंग , और जायंग , पाए जाते है। इनमे से पुमंग नर जननांग तथा जायंग मादा जननांग है।

· पुमंग -- पुमंग में एक या एक से अधिक पुंकेसर होते है। पुंकेसर में परागकण पाए जाते है।

· जायंग -- इसमें अंडप होते है। अंडप के तीन भाग होते है -- (1) अंडाशय ( Overy ) (2) परागकोष ( style ) (3) वर्तिकाग्र ( Stigma )


परागण : परागकोष से निकलकर अंडप के वर्तिकाग्र पर परागकणों के पहुंचने की क्रिया को परागण कहते है। परागण दो प्रकार से होता है --- (1 ) स्व - परागण ( Self - pollination ) (2) पर - परागण ( Cross - pollination)

निषेचन ( fertilization) : परागनली बीजाण्ड में प्रवेश करके बीजांडकाय को भेदती हुई भ्रूणकोष तक पहुँचती है और परागकणों को वह छोड़ देती है। इसके बाद एक नर युग्मक एक अंडकोशिका संयोजन करता है। इसे निषेचन कहते है। निषेचित अण्ड युग्मनज ( zygote) कहलाता है।

· आवृतबीजी में निषेचन त्रिक संलयन जबकि अन्य वर्ग के पोधो में द्विसंलयन होता है।

· अनिषेक फलन : कुछ पोधो में बिना निषेचन हुए ही अंडाशय से फल बन जाता है। इस प्रकार बिना निषेचन हुए फल के विकास को अनिषेक फलन कहते है। साधारणतया प्रकार के फल बीज रहित होते है। जैसे -- केला , पपीता ,नारंगी , अंगूर एवं अनन्नास आदि।

· फल का निर्माण · फल का निर्माण अंडाशय से होता है। सम्पूर्ण फलो को तीन भागो में बिभाजित किया गया है - 1. सरल फल : जैसे -- अमरुद , केला आदि। 2. पुंज फल : जैसे -- स्ट्राबेरी , रसभरी आदि 3. सग्रंथित फल : जैसे --- कटहल , शहतूत आदि

· कुछ फलो के निर्माण में बाह्य दलपुंज , दलपुंज , या पुष्पासन आदि भाग लेते है ऐसे फलो को असत्य फल कहते है। जैसे -- सेब , कटहल आदि।