भारत की राष्ट्रीय आय, India's national income

Updated: Sep 6

national income of India and national income of India UPSC MCQ

देश की अर्थव्यवस्था के आर्थिक निष्पादन की जानकारी का प्रमुख साधन राष्ट्रीय आय (National Income) है| स्वतंत्रता के पश्चात भारत सरकार ने राष्ट्रीय आय का अनुमान लगाने के लिये 4 अगस्त 1949 को राष्ट्रीय आय समिति का गठन किया जिसके अध्यक्ष पी सी महालनोविस थे.

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राष्ट्रीय आय

– किसी एक निश्चित वर्ष में उत्पादित अंतिम वस्तु एवं सेवाओं के कुल मौद्रिक मूल्य से राष्ट्रीय आय कहलाता है, “राष्ट्रीय आय में वस्तुओं एवं सेवाओं की बाज़ार कीमतें शामिल होती हैं”

राष्ट्रीय आय के आंकणॉं से कुल उत्पादन संदृद्धि दर, राष्ट्रीय आय का ढांचा प्रति व्यक्ति राष्टीय आय, बचत एवं निवेश एवं इत्यादि के सम्बंध में जानकारी प्राप्त होती है

भारत में राष्ट्रीय आय को मापने के लिये वित्त वर्ष 1 अप्रेल से 31 मार्च से माना जाता है

भारत में राष्ट्रीय आय का अनुमान सर्वप्रथम दादा भाई नौरोजी ने 1868 ई0 में लगाया था, उन्होने अपनी पुस्तक “पॉवर्टी एवं अनब्रिटिश रुल इन इंडिया” में राष्ट्रीय आय की गणना की थी

भारत में राष्ट्रीय आय की वैज्ञानिक गणना का श्रेय प्रो0 बी के आर वी राव को दिया जाता है, इन्होने राष्ट्रीय आय के अनुमान के लिये उत्पादन गणना प्रणाली तथा आय गणना प्रणाली के समिश्रण का प्रयोग किया, इनका अनुमान सबसे अधिक विश्वसनीय माना जाता है, इन्होने राष्ट्रीय आय का आंकलन अपनी पुस्तक “नेशनल इनकम इन ब्रिटिश इण्डिया” में प्रस्तुत किया

वर्तमान समय में भारत में राष्ट्रीय आय का अनुमान केंन्द्रीय सांख्यिकी संगठन द्वारा किया जाता है, इसकी स्थापना 2 मई 1951 ई0 को की गयी थी, तथा इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है

केंन्द्रीय सांख्यिकी संगठन (C.S.O.) के वार्षिक विवरण को राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी कहा जाता है जिसे श्वेत पत्र भी कहा जाता है

केंन्द्रीय सांख्यिकी संगठन (C.S.O.) ने राष्ट्र्रीय आय के आंकलन हेतु भारतीय अर्थव्यवस्था को तीन भागों में, (प्राथमिक, द्वितीयक तथा तृतीयक) तथा 14 उपक्षेत्रों को विभाजित किया है

प्राथमिक क्षेत्र –

कृषि, वानिकी, मछली पालन एवं खान पान द्वितीयक क्षेत्र–

विनिर्माण, निर्माण, बिजली, गैस और जल आपूर्ति तृतीयक क्षेत्र–

परिवहन, संचार, व्यापार, बैंकिंग एवं बीमा आदि सेवायें आती है

राष्ट्रीय आय को मापाने के लिये विधियॉं प्रचिलित हैं

  1. तीनउत्पादन गणना विधि

  2. आय गणना विधि

  3. उपभोग बचत विधि या व्यय विधि

उत्पादन गणना विधि इसके अंतर्गत किसी देश में एक वर्ष में उत्पादित अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं का मूल्य ज्ञात किया जाता है आय गणना विधि इसके अंतर्गत अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त आय का योग किया जाता है व्यय विधि इसके अनुसार राष्ट्रीय आय की गणना करने के लिये कुल उपभोग एवं कुल बचत का अनुमान लगाया जाता है इन दोनों का कुल योग ही राष्ट्रीय आय कहलाता है *केंन्द्रीय सांख्यिकी संगठन (C.S.O.) राष्ट्रीय आय का अनुमान करने के लिये उत्पादन विधि और आय विधि का प्रयोग करता है

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1.सकल घरेलू उत्पाद (G.D.P.) किसी देश की घरेलू सीमा के अंदर एक वर्ष में उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं के मौद्रिक मूल्य को सकल घरेलू उत्पादन कहते है 2.शुध्द घरेलू उत्पाद (N.D.P.) सकल घरेलू उत्पाद में से जब उत्पादन में प्रयुक्त मशीनों और पूंजी की घिसावट को घटा दिया जाये तो शुध्द घरेलू उत्पाद प्राप्त होता है शुध्द घरेलू उत्पाद (N.D.P.)=

सकल घरेलू उत्पाद (G.D.P.)-मूल्य ह्रास 3.सकल राष्ट्रीय उत्पाद(G.N.P.) किसी देश के द्वारा एक वर्ष में उत्पादित समस्त वस्तुओं और सेवाओं के मौद्रिक मूल्य को सकल राष्ट्रीय उत्पाद कहते है इसमें विदेशों से प्राप्त आय सम्मिलित होती है सकल राष्ट्रीय उत्पाद (G.N.P.) =

सकल घरेलू उत्पाद (G.D.P.) + विदेशों से अर्जित विशुध्द आय

4.शुध्द राष्ट्रीय उत्पाद (N.N.P.) सकल राष्ट्रीय उत्पाद से जब उत्पादन में प्रयुक्त मशीनों एवं पूँजी की घिसावट को घटा दिया जाता है तो शुध्द राष्ट्रीय उत्पाद प्राप्त होता है शुध्द राष्ट्रीय उत्पाद (N.N.P.) =

सकल राष्ट्रीय उत्पाद (G.N.P.) – मूल्य ह्रास

5.राष्ट्रीय आय (N.I.) साधन लागत पर शुध्द राष्ट्रीय उत्पाद को राष्ट्रीय आय कहते है प्रचलित कीमतों पर शुध्द राष्ट्रीय उत्पाद में से अप्रत्यक्ष कर को घटा दिया जाये और उत्पादन को जोड दिया जाये तो राष्ट्रीय आय प्राप्त होती है राष्ट्रीय आय (N.I.)

= प्रचिलित कीमतों पर शुध्द राष्ट्रीय आय – अप्रत्यक्ष कर + उपादान वास्तविक राष्ट्रीय आय (R.N.I.) किसी भी देश की मुद्रा की क्रय शक्ति में निरंतर परिवर्तन होता रहता है इसलिए वास्तविक राष्ट्र्रीय आय की जानकारी के लिए किसी आधार वर्ष के सापेक्ष शुध्द राष्ट्रीय उत्पाद की गणना की जाती है

प्रति व्यक्ति आय (P.C.I.) जब कुल राष्ट्रीय आय में से कुल जनसंख्या का भाग देते है तो प्रति व्यक्ति आय प्राप्त होती है, प्रति व्यक्ति आय दो तरह से प्राप्त की जा सकती है (1) प्रचलित कीमतों पर प्रति व्यक्ति आय- प्रचलित कीमतों पर राष्ट्रीय आय /वर्तमान जनसंख्या (2) स्थिर कीमतों पर प्रति व्यक्ति आय स्थिर कीमतों पर राष्ट्रीय आय / वर्तमान जनसंख्या वैतक्तिक आय एक वर्ष में राष्ट्र के निवासियों को प्राप्त होने वाली वास्तविक आय वैयक्तिक आय कहलाती है वैयक्तिक आय =

राष्ट्रीय आय + अंतरण भुगतान – निगम कर – अवतरित लाभ -सामाजिक सुरक्षा अनुदान व्यय योग्य आय प्रत्येक व्यक्ति एक वर्श में प्राप्त आय को पूर्णत: व्यय नहीं कर पाता बल्कि सरकार द्वारा प्रत्यक्ष कर के रुप में कुछ राशि ले ली जाती है शेष बची राशि को व्यय योग्य राशि कहते है

व्यय योग्य आय =

वैयक्तिक आय – प्रत्यक्ष कर