महाजनपद काल : Mahajanapadas, महाजनपद काल के महत्वपूर्ण तथ्य

Updated: Sep 7

ईसा पूर्व छठी शताब्दी में भारतीय राजनीति में एक नया परिवर्तन दृष्टिगत होता है। वह है-अनेक शक्तिशाली राज्यों का विकास।

अधिशेष उत्पादन, नियमित कर व्यवस्था ने राज्य संस्था को मजबूत बनाने में योगदान दिया। सामरिक रूप से शक्तिशाली तत्वों को इस अधिशेष एवं लौह तकनीक पर आधारित उच्च श्रेणी के हथियारों से जन से जनपद एवं साम्राज्य बनने में काफी योगदान मिला।

16 महाजनपद : – बुद्ध के समय में हमें सोलह महाजनपदों की सूची प्राप्त होती है।

अधिकतर राज्य विन्ध्य के उत्तर में, उत्तरी और पूर्वी भारत में, उत्तर पश्चिमी सीमा से बिहार तक फैले हुए थे।


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(1) अंग–यह सबसे पूर्व में स्थित जनपद था, इसके अन्तर्गत आधुनिक मुंगेर और भागलपुर जनपद सम्मिलित थे। इसकी राजधानी चम्पा थी। चम्पा नदी अंग को मगध से अलग करती थी। अन्ततोगत्वा मगध ने इसे अपने राज्य में मिला लिया था।

(2) मगध–इसमें आधुनिक पटना तथा गया जिलों और शाहाबाद जिले के हिस्सों का समावेश होता था। मगध अंग और वत्स राज्यों के बीच स्थित था।

(3)काशी–इसकी राजधानी वाराणसी थी।आरंभ में काशी सबसे शक्तिशाली था। परन्तु बाद में इसने कोसल की शक्ति के समने आत्मसमर्पण कर दिया। कालान्तर में काशी को अजातशत्रु ने मगध में मिला लिया।


(4)कोसल(अवध)–इसकी राजधानी श्रावस्ती थी। इसके अन्तर्गत पूर्वी उत्तर–प्रदेश का समावेश होता था। कोसल की एक महत्वपूर्ण नगरी अयोध्या थी जिसका सम्बन्ध राम के जीवन से जोड़ा जाता है। कोसल को सरयू नदी दो भागों में बाँटती थी–उत्तरी कोसल जिसकी राजधानी श्रावस्ती थी। दक्षिणी कोसल की राजधानी कुशावती थी। यहाँका राजा बुद्ध का समकालीन प्रसेनजित था।

(5) वजि (उत्तरी बिहार)–मगध के उत्तर में स्थित यह राज्य आठ कुलों के संयोग से बना था और इनमें तीन कुल प्रमुख थे–विदेह, वज्जि एवं लिल्छवि।

(6) मल्ल (गोरखपुर और देवरिया के जिले)–इसके दो भाग थे। एक की राजधानी कुशीनारा थी और दूसरे की पावा थी। कुशीनारा में | गौतमबुद्ध की मृत्यु हुई थी। कुशीनारा की पहचान देवरिया जिले के कसया नामक स्थान से की गयी है। |

(7)चेदि (यमुना और नर्मदा के बीच)–यह यमुना नदी के किनारे स्थित था। यह कुरु महाजनपद ही आधुनिक बुन्देलखण्ड का इलाका था।


(8)वत्स(इलाहाबाद का क्षेत्र)–इसकी राजधानी कौशाम्बी थी। संस्कृत साहित्य में प्रसिद्ध उदयन जो बुद्ध का समकालीन माना जाता है, इसी जनपद से संबन्धित था। वत्स लोग वही कुरुजन थे जो हस्तिनापुर के उत्तरवैदिक काल के अन्त में बाढ़ से बह जाने पर उसे छोड़कर प्रयाग के समीप कौशाम्बी में आकर बसे थे।

(9) कुरु (थानेश्वर, दिल्ली और मेरठ के जिले)–इसकी राजधानी इन्द्रप्रस्थ थी।

(10)पांचाल (बरेली, बदायूँ और फर्रुखाबाद के जिले)–इसके दो भाग थे–उत्तरी पांचाल तथा दक्षिणी पांचाल। उत्तरी पंचाल की राजधानी अहिच्छत्र और दक्षिणी पांचाल की राजधानी काम्पिल्य थी। उत्तरवैदिक काल की तरह कुरु एवं पांचाल प्रदेशों का अब महत्व नहीं रह गया था।

(11) मत्स्य (जयपुर)–इसकी राजधानी विराट नगर थी, विराट नगर की स्थापना विराट नामक व्यक्ति ने की थी।


(12) शूरसेन (मथुरा)–मथुरा शूरसेन राज्य की राजधानी थी। यहाँ का शासक अवंतिपुत्र महात्मा बुद्ध का अनुयायी था।

(13)अश्मक (गोदावरीपर)–इसकी राजधानी पोतना थी। यहाँ के शासक इक्ष्वाकुवंश के थे।

(14)अवन्ति (मालवा में)–आधुनिक मालवा व मध्य प्रदेश के कुछ भाग मिलकर अवंति जनपद का निर्माण करते थे। प्राचीन काल में अवंति के दो भाग थे (1) उत्तरी अवंति–जिसकी राजधानी उज्जैन थी तथा दक्षिणी अवन्ति जिसकी राजधानी महिष्मती थी।चण्ड प्रद्योत यहाँ का एक शक्तिशाली राजा था। मगध सम्राट शिशुनाग ने अवंति को जीतकर अपने राज्य में मिला दिया।



(15) गांधार (पेशावर और रावलपिंडी के जिले)–इसकी राजधानी तक्षशिला थी जो प्राचीन काल में विद्या एवं व्यापार का प्रसिद्ध केन्द्र थी। छठी शताब्दी ई० पू० में गंधार में पुष्कर सारिन राज्य करता था। इसने मगध नरेश बिम्बिसार को अपना एक राजदूत तथा एक पत्र भेजा था।

(16) कंबोज :(दक्षिण–पश्चिम कश्मीर तथा अफगानिस्तान का भाग)–यह आधुनिक काल के राजौरी एवं हजारा जिलों में स्थित था।


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