भारत के पर्वत, indian mountains

Updated: Sep 6, 2020

भारत के पर्वत



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हिमालय पर्वत

उत्तर में हिमालय पर्वत है जिसे हिम का घर (हिम + आलय) इसकी औसत ऊंचाई 2000 मीटर है कुल लम्बाई 5000 किमी है। इसकी औसत चैड़ाई 240 किमी है तथा क्षेत्राफल लगभग 5 लाख वर्ग किमी का है। हिमालय पर्वत श्रेणी को तीन भागों में बाँटा गया है - (1) उत्तरी पर्वत श्रेणियाँ - भारत के उत्तर में पश्चिम से पूर्व दिशा में सिन्धु तथा ब्रह्यपुत्रा नदियों के बीच लगभग 2500 किमी लम्बा हिमालय पर्वत है। इसकी चैड़ाई 150 से 400 किमी है। हिमालय में ही विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (8850 मी.) है। वास्तव में हिमालय कोई पर्वत नहीं, बल्कि एक दूसरे के लगभग समानान्तर रूप में पै$ली हुई तीन पर्वत मालाएँ हैं। इनका संक्षिप्त उल्लेख निम्नांकित है - (i) व्रहत हिमालय या आन्तरिक हिमालय यह हिमालय पर्वत की सबसे ऊंची श्रेणी है। इसकी औसत ऊंचाई 6000 मीतथा औसत चैड़ाई 25 किमी है। विश्व की उच्चतम चोटियाँ इस श्रेणी में स्थित है। महत्त्वपूर्ण चोटियाँ निम्नलिखित हैं-

अधिक ऊंचाई के कारण व्रहत् हिमालय सदा बर्फ़ से ढँका रहता है। अत: इसे ‘हिमाद्रि’ के नाम से पुकारा जाता है।

(ii) लघु हिमालय या मध्य हिमालय - यह व्रहत हिमालय के दक्षिण में लगभग उसके समानान्तर पूर्व-पश्चिम दिशा में विस्त्र्त है। इसकी औसत चैड़ाई 80 किमी तथा ऊंचाई 3700 से 4500 मीटर है। इसकी कई शाखाएँ हैं जिनमें पीर-पांजाल तथा धौलाधर प्रसिद्ध है। भारत के अधिकांश पर्वतीय पर्यटक स्थल जैसे - शिमला, मसूरी, डलहौजी, नैनीताल, दार्जिलिंग आदि लघु हिमालय की दक्षिणी ढलानों पर स्थित है। (iii) बाह्य हिमालय या उप-हिमालय अथवा शिवालिक श्रेणी यह लघु हिमालय के दक्षिण में इसके समानान्तर पूर्व-पश्चिम दिशा में फ़ैली है। इसकी चैड़ाई 10.50 किमी तथा ऊंचाई 900 से 1200 मीटर तक है। यह हिमालय पर्वत श्रंखला की अंतिम श्रेणी है और इसके दक्षिण में भारत का उत्तरी मैदान स्थित है। इस श्रेणी के बीच कहीं-कहीं कुछ समतल संरचनात्मक घाटियाँ पाई जाती हैं। जिन्हें पश्चिम में दून तथा पूर्व में द्वार (दुआरा) कहते हैं, जैसे - देहरादून तथा हरिद्वार। (2) उत्तर-पश्चिम शाखाएँ- - ये शाखाएँ सिंधु नदी से हटकर उत्तरपूर्व से दक्षिण-पश्चिम दिशा में विस्त्र्त है। इनमें हजारा, सुलेमान, बुगती, किरथर आदि सम्मिलित हैं। (3) उत्तर-पूर्व शाखाएँ - असम के उत्तर-पूर्व में हिमालय पर्वतमाला ब्रह्यपुत्रा नदी को पार करके दक्षिण-पश्चिम की ओर मुड़ गई है। ये हिमालय की पूर्वी शाखाएँ हैं। उत्तर में दक्षिण की ओर इस श्रेणी की मुख्य पहाड़ियों के नाम पटकाई, मणिपुर, मीजो आदि है। असम में इनकी एक शाखा पूर्व से पश्चिम की ओर विस्त्र्त है। जिनकी मुख्य पहाड़ियाँ खासी, जयन्तिया, तथा लुषाई आदि हैं। लद्दाख के उत्तर-पूर्व में काराकोरम पर्वत श्रेणी है इसे कृष्णगिरि भी कहते हैं। इसकी मध्यमान ऊंचाई 6000 मीटर है। इसकी सबसे ऊंची चोटी का नाम ज्ञ2 अथवा गाॅडविन-आस्टिन है, जिसकी ऊंचाई 8611 मीटर है। यह भारत की सबसे ऊंची चोटी है।


प्रायद्वीपीय पर्वत:

1. विन्ध्याचल पर्वत

यह पर्वतमाला में गुजरात से लेकर पूर्व उत्तर-प्रदेश तक जाती है। विन्ध्याचल पर्वत ही उत्तर व दक्षिण भारत को स्पष्ट रूप से अलग करता है। इसकी औसत ऊंचाई 200 मीटर है।

2. सतपुड़ा पर्वत सतपुड़ा पश्चिम में राजपीपला से आरम्भ होकर छोटा नागपुर के पठार तक विस्त्र्त है। महादेव और मैकाल पहाड़ियाँ भी इस पर्वतमाला का हिस्सा है। 1350 मी ऊंचा धूपगढ़ चोटी इसकी सबसे ऊंची चोटी है।

3. पूर्वी घाट इसकी औसत ऊंचाई 615 मीटर है ओर यह श्रेणी 1300 किलोमीटर लम्बी है। इस शष्ंखला की सबसे ऊंची चोटी महेंद्रगिरि (1501 मीटर) है। पूर्वी घाट के अंतर्गत दक्षिण से उत्तर की ओर पहाड़ियों को पालकोंडा, अन्नामलाई, नावादा और षिवराय की पहाड़ियों के नाम से जाना जाता है। 4. पश्चिमी घाट या सह्याद्रि इसकी औसत ऊंचाई 1200 मीटर है और यह पर्वतमाला 1600 किमी लम्बी है। इस श्रेणी में दो प्रमुख दर्रे हैं - थालघाट जो नासिक को मुम्बई से जोड़ता है और भोरघाट। तीसरा दर्रा पालघाट इस श्रेणी के दक्षिणी हिस्से को मुख्य श्रेणी से अलग करता है।

5. अरावली पर्वत यह राजस्थान से लेकर दिल्ली के दक्षिण पश्चिम तक विस्त्रत है। इसकी कुल लम्बाई लगभग 880 किमी है। ये विश्व के सबसे पुराने पर्वत हैं। गुरु शिखर (1722 मीटर) इनकी सबसे ऊंची चोटी है। इस पर प्रसिद्ध पर्यटन स्थल माउण्ट आबू स्थित है। प्रायद्वीप पर्वतों की सबसे ऊंची चोटी अन्नाईमुड़ी, अन्नामलाई पहाड़ियों में स्थित है। सुदूर-दक्षिण में काडोमम की पहाड़ियाँ हैं।

6. नीलगिरि या नीले पर्वत नीलगिरि की पहाड़ियाँ, पश्चिम घाट व पूर्वी घाट की मिलन स्थली है। नीलगिरि की सबसे ऊंची चोटी दोद्दाबेटटा है।


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