हिंदी भाषा महत्वपूर्ण तथ्य तथा इतिहास, Hindi language important facts and history

Updated: Aug 26

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दुनिया में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है हिंदी. कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

1. हिंदी भाषा मॉरिशस, फिजी, सुरीनाम, त्रिनिदाद और टोबेगो में भी बोली जाती है. 2. हिंदी वैसी सात भाषाओं में से एक है जिसका उपयोग वेब एड्रेस बनाने में किया जा सकता है. 3. हिंदी शब्द पर्सियन के 'हिंद' शब्द से बना है. इसका मतलब सिंधु नदी के क्षेत्र से है. 4. संविधान सभा ने हिंदी भाषा को आध‍िकारिक भाषा के रूप में 14 सितंबर 1949 को चुना था. इसी वजह से 14 सितंबर को हर साल हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है. 5. 1981 में बिहार ने उर्दू भाषा की जगह हिंदी भाषा को कार्यालयों में जगह दी. इसी के साथ बिहार हिंदी को अपनाने वाला देश का पहला राज्य बन गया. 6. 1965 में हिंदी को भारत की आध‍िकारिक भाषा के रूप में स्वीकार कर लिया गया. 7. लगभग 500 मिलियन लोग हिंदी भाषा का प्रयोग करते हैं. 8. 1805 में छपी लल्लू लाल की किताब 'प्रेम सागर' को हिंदी की पहली किताब माना जाता है. इस किताब में भगवान कृष्ण की लीलाओं का वर्णन है. 9. मार्केट में हिंदी टाइपराइटर मशीन 1930 में आई थी.

10. हिंदी की स्क्रिप्ट फोनेटिक (शब्द उच्चारण) पर आधारित है. यह जैसे बोली जाती है, वैसे ही लिखी भी जाती है.

हिंदी का संक्षिप्त इतिहास तथा जानकारी

हिन्दी' वास्तव में फारसी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ है-हिन्दी का या हिंद से संबंधित। हिन्दी शब्द की निष्पत्ति सिन्धु-सिंध से हुई ह ै। ईरानी भाषा में 'स' का उच्चारण 'ह' किया जाता था। इस प्रकार हिन्दी शब्द वास्तव में सिन्धु शब्द का प्रतिरूप है। कालांतर में हिंद शब्द संपूर्ण भारत का पर्याय बनकर उभरा । इसी 'हिन्द' से हिन्दी शब्द बना। आज हम जिस भाषा को हिन्दी के रूप में जानते है, वह आधुनिक आर्य भाषाओं में से एक है। आर्य भाषा का प्राचीनतम रूप वैदिक संस्कृत है, जो साहित्य की परिनिष्ठित भाषा थी। वैदिक भाषा में वेद, संहिता एवं उपनिषदों-वेदांत का सृजन हुआ है। वैदिक भाषा के साथ-साथ ही बोलचाल की भाषा संस्कृत थी,जिसे लौकिक संस्कृत भी कहा जाता है। संस्कृत का विकास उत्तरी भारत में बोली जाने वाली वैदिककालीन भाषाओं से माना जाता है। अनुमानत: ८ वी.शताब्दी ई.पू.में इसका प्रयोग साहित्य में होने लगा था। संस्कृत भाषा में ही रामायण तथा महाभारत जैसे ग्रन्थ रचे गए। वाल्मीकि, व्यास, कालिदास, अश्वघोष, माघ, भवभूति, विशाख, मम्मट, दंडी तथा श्रीहर्ष आदि संस्कृत की महान विभूतियां है। इसका साहित्य विश्व के समृद्ध साहित्य में से एक है।

संस्कृतकालीन आधारभूत बोलचाल की भाषा परिवर्तित होते-होते 500 ई.पू.के बाद तक काफ़ी बदल गई,जिसे 'पाली' कहा गया। महात्मा बुद्ध के समय में पाली लोक भाषा थी और उन्होंने पाली के द्वारा ही अपने उपदेशों का प्रचार-प्रसार किया। संभवत: यह भाषा ईसा की प्रथम ईसवी तक रही। पहली ईसवी तक आते-आते पालि भाषा और परिवर्तित हुई,तब इसे 'प्राकृत' की संज्ञा दी गई। इसका काल पहली ई.से 500 ई.तक है। पाली की विभाषाओं के रूप में प्राकृत भाष ाए ं- पश्चिमी,पूर्वी ,पश्चिमोत्तरी तथा मध्य देशी ,अब साहित्यिक भाषाओं के रूप में स्वीकृत हो चुकी थी,जिन्हें मागधी,शौरसेनी,महाराष्ट्री,पैशाची,ब्राचड तथा अर्धमागधी भी कहा जा सकता है। आगे चलकर,प्राकृत भाषाओं के क्षेत्रीय रूपों से अपभ्रंश भाषाएं प्रतिष्ठित हुई। इनका समय 500 ई.से 1000 ई.तक माना जाता है। अपभ्रंश भाषा साहित्य के मुख्यत: दो रूप मिलते है - पश्चिमी और पूर्वी । अनुमानत: 1000 ई.के आसपास अपभ्रंश के विभिन्न क्षेत्रीय रूपों से आधुनिक आर्य भाषाओं का जन्म हुआ। अपभ्रंश से ही हिन्दी भाषा का जन्म हुआ। आधुनिक आर्य भाषाओं में,जिनमे हिन्दी भी है, का जन्म 1000 ई.के आसपास ही हुआ था,किंतु उसमे साहित्य रचना का कार्य 1150 या इसके बाद आरंभ हुआ।

अनुमानत: तेरहवीं शताब्दी में हिन्दी भाषा में साहित्य रचना का कार्य प्रारम्भ हुआ,यही कारण है कि हजारी प्रसाद द्विवेदी जी हिन्दी को ग्राम्य अपभ्रंशों का रूप मानते है। आधुनिक आर्यभाषाओं का जन्म अपभ्रंशों के विभिन्न क्षेत्रीय रूपों से इस प्रकार माना जा सकता है -